tetarbenewsandviews
Saturday, July 17, 2010
Friday, July 16, 2010
मेरी बात
आज मैं अपनी बात सबके सामने रखना चाहता हूँ । मेरी कलम को रोकने की कोशिश अनेक लोगों ने की, लेकिन सच की कलम कभी नहीं रुकती है । जब मैंने पत्रकारिता शुरू की थी तभी तय कर लिया था कि मैं जनता के पक्ष में ही लिखूंगा और मैंने वही किया।
एक वरीष्ठ पत्रकार ने तो मेरी सच्चाई से डर कर मेरी नौकरी ही छीन ली। दूसरे पत्रकार ने भी मुझे आर्यावर्त अख़बार से चलता करावा दिया। भूखों रहने की भी नौबत आती रही।साथ ही , मेरी नौकरी आती जाती रही। मेरे बच्चों ने भी मेरी गरीबी झेली । एक समय तो मेरी पत्नी और बच्चों ने मुझमें आस्था ही खो दी। सभी निरुत्साहित हो गए। लेकिन मेरे पास कलम के आलावा और कुछ तो था ही नहीं। बाद में मेरे बच्चों ने भी समझ लिया कि उनको मेरी कलम के साथ ही जीना होगा। मेरी पत्नी और बच्चों ने फिर मेरी खूब मदद की। मेरी कलम ने धीरे धीरे रंग दिखलाना शुरू कर दिया।
मैंने खूब लिखा और आज भी लिख रहा हूँ । आम जनता के हक़ में लिख रहा हूँ। आज मेरे परिवार में सब कुछ ठीकठाक है। मुझको मेरी साहित्यिक रचनाओं के लिए झारखण्ड रत्न से नवाजा गया है। आज मुझे अपनी कलम पर गर्व है । लेकिन आज भी मेरे विरोधी या यूं कहूं कि सच के विरोधी, मेरे खिलाफ अभियान चलाते ही रहते हैं। उनकी ऊर्जा बर्बाद होती ही रहती है और अब मैं उनकी परवाह बिलकुल नहीं करता हूँ। कोई किसी की कलम को कभी रोक नहीं सकता है । लिखने के लिए पूरी दुनिया में माध्यम की कोई कमी नहीं है। लिखने का जज्बा होना चाहिए। लिखने का उद्देश्य होना चाहिए। लिखने का कारण होना चाहिए। कलम में जनहित होना चाहिए।
आज भ्रष्ट पत्रकार अपने अख़बार के समाचार स्पेस को विज्ञानप के रूप में बेच रहे हैं। घूस खा रहे हैं। पत्रकारिता की गरिमा को गिरा रहे हैं। उनमें और भ्रष्ट राजनेताओं में कोई फर्क नहीं रह गया है। दोनों का भ्रष्टाचार एक दुसरे के सक्रिय सहयोग से चलता है। झारखण्ड में सिर्फ एक राजनेता ने पांच हजार करोड़ रुपए डकार लिए और अख़बार वालों को इसकी भनक भी नहीं लगी। यह बात कितनी आश्चर्यजनक है? राजनेता की काली कमाई से एक समाचार चैनल भी शुरू हो गया। अब इस चैनल की पत्रकारिता कैसी होगी? यह चैनल जनता को लूटने का काम करेगा। स्वहित में काम करेगा।
चाहे कुछ भी हो जाये मानवता के लिए मेरी कलम चलती ही रहेगी। यह तब तक चलेगी जब तक मैं कलम उठाने के काबिल रहूँगा।
मैं समझता हूँ की जीवन में अगर कुछ मानवता के लिए करना है तो मुझे जीवनभर संघर्ष करते रहना होगा। संघर्ष ही असली जिन्दगी है। मैंने इस जिन्दगी से बहुत कुछ सीखा है। बहुत कुछ महसूस किया है। मैंने जो अनुभव किया है मैं उसको सबके साथ बाँटना चाहता हूँ। मैंने यह ब्लॉग इसी लिए शुरू किया है।
मैंने जीवन में एक पत्रकार के रूप में जो कुछ भी महसूस किया है वह मानवता के लिए लाभदायक है , ऐसा मेरा अनुमान है। पत्रकार के रूप में मैंने ३५ वर्ष काम किया है और इस दौरान मैंने जिस जगत को करीब से देखा ,वह चौंकाने वाला है। थोड़े से धन के लिए लोग क्या क्या नहीं कर गुजरते हैं। सारे नाते-रिश्ते भूल जाते हैं। उनको केवल धन ही याद रह जाता है। लेकिन उनको अपनी कही बात भी याद नहीं रहती है। आज जो बोलते हैं उससे तुरंत पलट जाते हैं। कोई शर्म भी महसूस नहीं करते हैं। मैं हर दिन आप सब के लिए लिखता रहूँगा और आप मुझे अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहेंगे (jaari)
एक वरीष्ठ पत्रकार ने तो मेरी सच्चाई से डर कर मेरी नौकरी ही छीन ली। दूसरे पत्रकार ने भी मुझे आर्यावर्त अख़बार से चलता करावा दिया। भूखों रहने की भी नौबत आती रही।साथ ही , मेरी नौकरी आती जाती रही। मेरे बच्चों ने भी मेरी गरीबी झेली । एक समय तो मेरी पत्नी और बच्चों ने मुझमें आस्था ही खो दी। सभी निरुत्साहित हो गए। लेकिन मेरे पास कलम के आलावा और कुछ तो था ही नहीं। बाद में मेरे बच्चों ने भी समझ लिया कि उनको मेरी कलम के साथ ही जीना होगा। मेरी पत्नी और बच्चों ने फिर मेरी खूब मदद की। मेरी कलम ने धीरे धीरे रंग दिखलाना शुरू कर दिया।
मैंने खूब लिखा और आज भी लिख रहा हूँ । आम जनता के हक़ में लिख रहा हूँ। आज मेरे परिवार में सब कुछ ठीकठाक है। मुझको मेरी साहित्यिक रचनाओं के लिए झारखण्ड रत्न से नवाजा गया है। आज मुझे अपनी कलम पर गर्व है । लेकिन आज भी मेरे विरोधी या यूं कहूं कि सच के विरोधी, मेरे खिलाफ अभियान चलाते ही रहते हैं। उनकी ऊर्जा बर्बाद होती ही रहती है और अब मैं उनकी परवाह बिलकुल नहीं करता हूँ। कोई किसी की कलम को कभी रोक नहीं सकता है । लिखने के लिए पूरी दुनिया में माध्यम की कोई कमी नहीं है। लिखने का जज्बा होना चाहिए। लिखने का उद्देश्य होना चाहिए। लिखने का कारण होना चाहिए। कलम में जनहित होना चाहिए।
आज भ्रष्ट पत्रकार अपने अख़बार के समाचार स्पेस को विज्ञानप के रूप में बेच रहे हैं। घूस खा रहे हैं। पत्रकारिता की गरिमा को गिरा रहे हैं। उनमें और भ्रष्ट राजनेताओं में कोई फर्क नहीं रह गया है। दोनों का भ्रष्टाचार एक दुसरे के सक्रिय सहयोग से चलता है। झारखण्ड में सिर्फ एक राजनेता ने पांच हजार करोड़ रुपए डकार लिए और अख़बार वालों को इसकी भनक भी नहीं लगी। यह बात कितनी आश्चर्यजनक है? राजनेता की काली कमाई से एक समाचार चैनल भी शुरू हो गया। अब इस चैनल की पत्रकारिता कैसी होगी? यह चैनल जनता को लूटने का काम करेगा। स्वहित में काम करेगा।
चाहे कुछ भी हो जाये मानवता के लिए मेरी कलम चलती ही रहेगी। यह तब तक चलेगी जब तक मैं कलम उठाने के काबिल रहूँगा।
मैं समझता हूँ की जीवन में अगर कुछ मानवता के लिए करना है तो मुझे जीवनभर संघर्ष करते रहना होगा। संघर्ष ही असली जिन्दगी है। मैंने इस जिन्दगी से बहुत कुछ सीखा है। बहुत कुछ महसूस किया है। मैंने जो अनुभव किया है मैं उसको सबके साथ बाँटना चाहता हूँ। मैंने यह ब्लॉग इसी लिए शुरू किया है।
मैंने जीवन में एक पत्रकार के रूप में जो कुछ भी महसूस किया है वह मानवता के लिए लाभदायक है , ऐसा मेरा अनुमान है। पत्रकार के रूप में मैंने ३५ वर्ष काम किया है और इस दौरान मैंने जिस जगत को करीब से देखा ,वह चौंकाने वाला है। थोड़े से धन के लिए लोग क्या क्या नहीं कर गुजरते हैं। सारे नाते-रिश्ते भूल जाते हैं। उनको केवल धन ही याद रह जाता है। लेकिन उनको अपनी कही बात भी याद नहीं रहती है। आज जो बोलते हैं उससे तुरंत पलट जाते हैं। कोई शर्म भी महसूस नहीं करते हैं। मैं हर दिन आप सब के लिए लिखता रहूँगा और आप मुझे अपनी प्रतिक्रिया भी देते रहेंगे (jaari)
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